प्रिये मोहयाल मित्रो
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वर्ष २०१३ जाने को है, कुछ दिनों मैं वह अतीत हो जायेगा .. जाते वर्ष की
सफलताओं-असफलताओं को महसूस कर हम आतीत का आकलन करते है और भविष की योजना
बनाते हैं !
'असफलता' न तो आखरी सिरा है न ही जीवन का अंत...! यह वह
पहली सीढ़ी है, जहाँ से मंजिल के रास्ते खुलते हैं ! फिर ये वो सीख है, जो
कहीं और से नहीं मिल सकती है। असफलता को ग्रहण कर उससे सीखें, जीवन की
प्राथमिकताएँ तय करें और आत्मविश्वास से आगे बढ़ें !
'' व्यक्ति अगर यह कहे कि वह जीवन में हमेशा जीतता आया है तो यकीन मानिये वह सरासर झूठ बोल रहा है ''
कोई भी व्यक्ति सफलता के शिखर पर, हारने के बाद ही पहुँचता है। हार ही
उसके मन में जीतने के लिए कोशिश करने की लालसा पैदा करती है, अपने लक्ष्य
को प्राप्त करने के जुनून को और पुख्ता करती है।
अपनी असफलता को
चुनौती के रूप में स्वीकारना, जीत की तरफ ले जाने वाला पहला कदम है। असफल
व्यक्ति को कोई प्रोत्साहित नहीं करता, उसे खुद को प्रोत्साहित करना होगा ;
तभी वह सफल भी हो सकेगा और यह पक्का है ज्यों ही व्यक्ति सफल हुआ दुनिया
उसे प्रोत्साहन, पारिश्रमिक, पारितोषिक देने दौड़ पड़ेगी। जरूरत है मैदान में
पूरे आत्मविश्वास के साथ डटे रहने की।
आने वाला वर्ष की आप सब को मंगलकामनाओं ..उस पर भी चर्चा करेंगे हम-आप ''आम-मोहयाल'' !
( नोट - मैरे यह विचार मैरे ' आम - मोहयाल ' के निजी विचार है जो पड़ने-समझने के बाद आप से शेयर किये हैं )
जय मोहयाल ,जय माता दी !!
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